मुर्गी पालन बिज़नस कैसे सुरू करें | How to Start Poultry Farming Business

मुर्गी पालन बिज़नस कैसे सुरू करें (How to Start Poultry Farming Business), आज पूरे भारत के साथ- साथ पूरे विश्व मै मांस की मांग है। मुर्गी पालन एक ईसा बिज़नस है जो कृषि क्षेत्र मै सबसे तेज विकास होने वाला बिज़नस माना जा रहा है। आज भारत सरकार इस बिज़नस को आगे बढ़ाने के लिए कुछ सहाय्यता प्रदान करती है। जैसे की प्रोसेसिंग, प्रजनन, पालन और पोषण यादी करने के लिए। 

आज भारत मै लगबग 30 लाख किसान और 1.5 करोड़ कृषि किसान मुर्गी पालन बिज़नस कर रहे है। 

मुर्गी पालन बिज़नस कैसे सुरू करें

मुर्गी पालन बिज़नस कैसे सुरू करें | How to Start Poultry Farming Business

मुर्गी पालन एक ऐसा बिज़नस है जो आप कम पैसा लगाके हर महीने करीबन 1 लाख रुपये तक का इंनकम कमा सकते है। आपके पास मुर्गी पालन बिज़नस सुरू करने के लिए सुरवाती मै 2-3 लाख रुपये लगाके 1000 नस्ले रखने और उनकी देखभाल करने के लिए खर्चाआता है। मुर्गी पालन बिज़नस कैसे सुरू करें (How to Start Poultry Farming Business) इसके बारे मै नीचे डीटेल मै जानकारी दी गई है। 

एक नया मुर्गी पालन का बिज़नस कैसे सुरू करे इसके बारे मै डीटेल मै जानकारी दी गई है। 

1. किस टाइप का मुर्गी पालन करना है उस क्षेत्र को चुनें। 

मोटे तौर पर पोल्ट्री फार्मिंग दो प्रकार की होते है- ब्रॉयलर और लेयर्स।

  • ब्रॉयलर: ब्रॉयलर मुर्गी पालन कोई भी चिकन होता है जिसे विशेष रूप से मांस उत्पादन के लिए पाला और उगाया जाता है। अधिकांश व्यावसायिक ब्रॉयलर चार से सात सप्ताह की उम्र के बीच वध के वजन तक पहुंच जाते हैं, हालांकि धीमी गति से बढ़ने वाली नस्लें लगभग 14 सप्ताह की उम्र में वध के वजन तक पहुंच जाती हैं।
  • लेयर्स : लेयर मुर्गी पालन का अर्थ है व्यावसायिक अंडा उत्पादन के उद्देश्य से अंडा देने वाले पोल्ट्री पक्षियों को पालन करना। लेयर मुर्गियों की ऐसी विशेष प्रजाति हैं, जिन्हें एक दिन की उम्र से ही पालने की जरूरत होती है। वे 18-19 सप्ताह की उम्र से व्यावसायिक रूप से अंडे देना शुरू कर देते हैं।

तो आपको कोनसा मुर्गी पालन का बिज़नस सुरू करना है, ये पहिले चयन करने की जरूरत है। आपको केवल मास के लिए मुर्गी पालन करना है तो आप ब्रॉयलर मुर्गी पालन सुरू कर सकते है, और आपको अंडे के लिए मुर्गी पालन करना है तो आपण लेयर मुर्गी पालन की सुरवात कर सकते है। 

और आपको अलग अलग क्षेत्रों में मुर्गी पालन करना है तो आप इनमें से चुन सकते है:-

  • मांस उत्पादन
  • अंडा उत्पादन
  • पोल्ट्री फीड उत्पादन
  • चिकन ब्रीडिंग (हैचरी)
  • अंडा और मांस प्रसंस्करण

2. जगह का इंतजाम करे।

आप जीस भी जगह का इंतजाम करंगे उस जगह साफ सुधीरी, खुली हवा रहने वाली, सुरक्षीत होनी चाहिए। क्यौंकी जगह सबसे इंपोर्टेंट है, और उससे आपको आगे कितना लाभ होगा ये जगह पर निर्धारित करेगा।

उसके बाद जगह ऐसी होनी चाहिए की जब आपको मार्केट नजतिक हो, नहीं तो आपको बाद मै ट्रांसपोट का खर्चा बढ़ सकता है। इसके साथ आपको पानी, लाइट आदि की सुविधा होनी चाहिए।

3. अपने बिज़नस का पंजीकरण करे। 

आप अपने मुर्गी पालन बिज़नस को MSMI के ध्वरा एक कंपनी के माध्यम से पंजीकरण करे। इसके लिए आपको udyamregistration.gov.in इस वैबसाइट पर जाना होता है।

मुर्गी पालन बिज़नस कैसे सुरू करें

उस वैबसाइट मै जाने के बाद आपको “For New Entrepreneurs who are not Registered yet as MSME or those with EM-II” इस लींक पर क्लिक करना पड़ता है।

मुर्गी पालन बिज़नस कैसे सुरू करें

इसके बाद आप अपना आधार नंबर और उद्यमी का नाम डालके “Validate & Generate OTP” पर क्लिक करे।

इसके बाद आपके सामने एक फॉर्म ओपेन हो जायगा उसमे आप अपने कंपनी का नाम, कंपनी का प्रकार, डीटेल मै एड्रैस, बैंक डिटेल्स, यादी भरके सबमिट पर क्लिक करे।

उसके बाद आपको MSMI की तरफ़से एक सर्टिफिकेट Generate होता है और वो सर्टिफिकेट आपको ईमेल मै भी मिलता है, उसकी प्रिंट निकालके आप ऑफिस मै लगा सकते है।

4. मुर्गी पालन करने के लिए शेड बनाना। 

आपको कितने नस्ले का पालन करना है उसी हिसाब से आपको शेड बनवाना पड़ता है। एक मुर्गी के लिए आपको 1 से 1.5 sqft जगह लगती है। आप 1000 मुर्गी पालन करना चाहते है तो आपको 1000-1500 sqft का शेड बनवाना पड़ता है।  शेड बनवाते समय ध्यान दे की उसमे चारों तरफ़से हवा आती रहे।

5. मुर्गी के नस्ले खरीदे 

आपको मुर्गी पालन सुरू करने से पहिले किस प्रकार की मुर्गी की पालन करंगे ये तय करना पड़ता है। आज भारत मै अलग – अलग टाइप के मुर्गी की नसस्ले मिलते है और आपको एक लाभदायक बिज़नस करने के लिए सही मुर्गी का चयन करना पड़ता है।

नीचे कुछ मुर्गी के नसस्ले के बारे मै जानकारी दी गई है।

असेल नस्ल 

असेल नस्ल आपको पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और आंध्र प्रदेश मै पाये जाते है। इसके अलावा असेल नस्ल भारत के बाहर ईरान मै पाये जाते है। असेल नस्ल का पालन मीट उत्पादन (चिकन के लिए) करने के लिए किया जाता है, क्योकि इसका अंडा कमजोर होता है। इसका वजन साधारण 3-5 किलो के दरम्यान होता है।

कड़कनाथ नस्ल

कड़कनाथ नस्ल मुख्य तौर पर भारत मै मध्य प्रदेश मै पायी जाती है। कड़कनाथ नस्ल को काली मासी के नाम से भी जाना जाता है। ये नस्ल मीट उत्पादन (चिकन के लिए) पूरे भारत मै प्रसिद्ध है। और उसे आम तौर पर काले रंग से भी जाना जाता है। इसमे अन्य नस्ल की तुलना मै प्रोटीन की मात्रा अधिक है। कड़कनाथ नस्ल एक साल मै 70-80 अंडे देती है।

ग्रामप्रिया नस्ल

ग्रामप्रिया नस्ल को भारत सरकार ध्वरा हैदराबाद स्थित अखिल भारतीय समन्वय अनुसंधान परियोजना के तहत विकसित किया गया है। इस नस्ल का वजन 12 हफ्ते मै 1.5 से 2 किलो होता है। और इस टाइप के नस्ल एक साल मै 210 से 225 अंडे देती है, इसका एनसे का रंग भूरा होता है। और अंडे का वजन साधारण 55 से 60 ग्राम होता है।

स्वरनाथ नस्ल

स्वरनाथ कर्नाटक पशु चिकित्सा एवं मत्स्य विज्ञान और विश्वविद्यालय, बंगलौर द्वारा विकसित चिकन की एक नस्ल है। 22 से 23 सप्ताह मे इसका वजन 3 से 4 किलो होता है। और इसकी अंडे की क्षमता हर साल मै 180-190 रहती है।

कामरूप नस्ल

यह बहुआयामी चिकन नस्ल है जिसे असम में कुक्कुट प्रजनन को बढ़ाने के लिए अखिल भारतीय समन्वय अनुसंधान परियोजना द्वारा विकसित किया गया है। इसका वजन 40 हफ्ते मै 1.8 से 2.2 किलो रहता है, और इसकी हर साल मै 118 से 130 अंडे देनी की क्षमता रखती है। इसका अंडे का वजन 52 ग्राम रहता है।

चिटागोंग नस्ल

चिटागोंग नस्ल का वजन 4 से 5 किलो तक रहता है और इस नस्ल एक साल मै 70-120 अंडे की क्षमता रखता है। चिटागोंग नस्ल सबसे ऊंची नस्ल मै से एक मानी जाती है।

केरी श्यामा नस्ल

केरी श्यामा नस्ल 24 हफ्ते मै लगभग इसका वजन 1.2 से 1.5 किलो तक रहता है। और इसकी अंडे देनी की क्षमता साल मे 85 होती है। ये आमतौर पर मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान मे पायी जाती है।

झारसीम नस्ल 

झारसीम नस्ल झारखंड मै पायी जाती है। ये अपना पहला अंडा 180 दिन के बाद देती है, और हर साल मै 165-170 अंडे देती है। इसके अंडे का वजन साधारण 55 ग्राम रहता है। और ये परिपक्व होने के बाद इसका वजन 1.5 से 2 किलो के बीच मै रहता है।

6. उसके खाने का इंतजाम करे।

नस्ले की जल्दी विकास होने के लिए आप उनको अलसी, मक्का यादी दे सकते है। ये एक पौष्टिक आहार है जो नस्ले को जल्दी विकसित करता है।

इसके साथ आप नस्ले की साफ पानी, बर्तन साफ रखना जरूरी है जो उनकी स्वास्थ्य के लिए ज्यादा फायदेमंद रहेगा। आप नस्ले और मुर्गे को रात के बजाए दिन मै खाना दे सकते है। क्यौंकी ये रात मै खाना नहीं खाते।

7. बिज़नस करने के लिए बाजार की तलाश करे। 

आपको अपने मुर्गे बेचने के लिए आपको मार्केट की तलाश करनी पड़ती है। इसके लिए आप सबसे पहिले लोकल और नजतिक का मार्केट ढूंड सकते है, इसमे आप चिकन शॉप, लोकल बाजार यादी मै जाके अपने मुर्गे को बेच सकते है।

ये होने के बाद आप बाहर बड़ी कंपनी से कांटैक्ट करके अपने मुर्गे को बेच सकते है। आप जहा से मुर्गे के नस्ले खरीद लाये है वहा भी मुर्गे को बेच सकते है।

मुर्गी पालन के लाभ

1. मुर्गी पालन करने के लिए आपको कम लागत लगती, जमीन और हाइ प्रॉफ़िट मिलता है।

2. मुर्गी पालन करने के लिए आपको कम जगह की आवश्यकता है।

3. आपको कम टाइम, खर्च मै ज्यादा मुनाफा मिलता है।

4. मुर्गी पालन करने के लिए आपको कम रखरखाव की आवश्यकता लगती है, साथ ही, आप उचित स्वच्छता और देखभाल का पालन करके पोल्ट्री में बीमारियों और बीमारी को कम कर सकते हैं।

5. मुर्गी पालन बिज़नस करने के लिए आपको लैसेंस की जरूरत नहीं है।

6. मुर्गी आपको ताजा और पौष्टिक आहार देती है और इसकी वैश्विक मांग बहुत अधिक है। इसलिए, पोल्ट्री उत्पादों के वैश्विक उपभोक्ता अपने पोषक तत्वों और ताजगी के कारण उन्हें पसंद करते हैं।

7. पोल्ट्री उत्पादों का मार्केटिंग करना बहुत आसान है। दुनिया के लगभग सभी जगहों पर पोल्ट्री उत्पादों का एक स्थापित बाजार है। तो आप आसानी से अपने नजदीकी स्थानीय बाजार में उत्पादों को बेच सकते हैं।

8. कुक्कुट पालन से आय और रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। बेरोजगार शिक्षित युवा आसानी से व्यावसायिक रूप से मुर्गी पालन करके बड़ी आय अर्जित कर सकते हैं। इस व्यवसाय को महिलाएं और छात्र भी कर सकते हैं।

9. लगभग सभी बैंक इस प्रकार के व्यावसायिक उपक्रमों के लिए लोन स्वीकृत करते हैं। इसलिए, यदि आप इस व्यवसाय को व्यावसायिक रूप से शुरू करना चाहते हैं, तो आप अपने स्थानीय बैंकों में लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं। भारत में लगभग सभी शीर्ष बैंक मुर्गी पालन के लिए लोन प्रदान करते हैं।

मुर्गी पालन करने के लिए लोन कैसे मिलेगा?

मुर्गी पालन बिज़नस करने के लिए आपको प्राइवेट और पब्लिक सैक्टर के बैंक लोन प्रोवाइड कराते है। ये लोन आपको ग्रामीण या शहरी क्षेत्रों में व्यक्तियों, एमएसएमई और व्यापार मालिकों को दिया जाता है।

मुर्गी पालन बिज़नस करने के लिए सरकारी योजनाओं में नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (NABARD), पोल्ट्री वेंचर कैपिटल फंड (PVCF), आदि शामिल हैं। आप जिस भी बैंक से लोन लेते है उस बैंक नाबार्ड के अंतर्गत आपको सब्सिडी प्रदान करती है। इसके लिए आपको बाहर आवेदन करने की जरूरत नहीं है। 

आपको दी जाने वाली लोन की राशि व्यावसायिक आवश्यकताओं पर निर्भर करेगी और ऋणदाता से ऋणदाता में भिन्न होगी।

मुर्गी पालन बिज़नस करने के लिए कई बैंक लोन की पेशकश कर रहे हैं, जैसे की एचडीएफसी बैंक, एसबीआई, पीएनबी, फेडरल बैंक, आईडीबीआई बैंक, एक्सिस बैंक, केनरा बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, आदि।

कुछ पौल्ट्री बिज़नस मैन बिना सुरक्षा के पोल्ट्री फार्म की पेशकश करते हैं, लेकिन अधिकांश बैंकों को लोन देने से पहले आपको कोल्लातेरल और सेक्युर्टी डिपॉज़िट मांगते है।

आपको लोन के लिए आवेदन करने के लिए डॉक्युमेंट्स

  • पासपोर्ट आकार की तस्वीरों के साथ विधिवत भरा हुआ पोल्ट्री फार्म आवेदन पत्र
  • आइडैनटिटि प्रूफ, एज प्रूफ, एड्रैस प्रूफ, इंकम प्रूफ
  • ईंकोर्पोरतिओन का सर्टिफिकेट
  • बिज़नस पैन कार्ड
  • मुर्गी पालन बिज़नस सुरू करने की पर्मिट की कॉपी
  • पशु देखभाल मानकों से परमिट
  • उपकरण, पिंजरों, पक्षियों की खरीदा हुया बिल
  • पौल्ट्री का प्लान और इसका एस्टीमेट
  • जमीन मालिक का सर्टिफिकेट
  • इन्शुरेंस पॉलिसी का सर्टिफिकेट

मुर्गी फार्म बनाने में कितना खर्चा आएगा

आपको 1000 नस्ले से मुर्गी पालन का बिज़नस सुरू करना चाहते है तो आपको अलग – अलग टाइप का खर्चा देना पड़ता है।

1. शेड बनाने का खर्च: इसमे ब्रिक वाल की कम्पाउण्ड वाल रहेगी  Rs.90,0000/-
2. पौल्ट्री के लिए equipment’s का खर्चा  Rs. 15,000/-
3. पानी, लाइट यादी खर्चा  Rs. 6,100/-
4. नस्ले का खर्च प्रती 37 रूपीस   Rs 37,000/-
5. बॉयलर स्ट्राटर और फिनिशर फीड का खर्च प्रती 19/kg  Rs. 65,170/-
6. अन्य खर्चा  Rs. 3,000/-
टोटल खर्चा  Rs. 2,16,266/-

 

पोल्ट्री फार्म लाइसेंस

कुछ लाइसेंस हैं जिन्हें आपको स्थानीय अधिकारियों से प्राप्त करने की आवश्यकता है और कुछ राज्य सरकार से।

1. ग्राम पंचायत से आपको नो objection सर्टिफिकेट की जरूरत है।

2. पोल्लुटीओन बोर्ड से आपको NOC सर्टिफिकेट लगता है।

3. पौल्ट्री फार्म के साइज़ के आधार पर ट्रांसफार्मर लगाने की विद्युत अनुमति लगती है।

4. ग्राउंड वॉटर डिपार्टमेंट से अनुमती लगती है।

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